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अपने अपने रामकारिक विद्वान श्री भगवान सिंह की अनूपम कृति है 'अपने अपने राम' । राम का चरित्?

PDF ¾ BOOK अपने अपने राम FREE भगवान सिंह का जन्म जुलाई गोरखपुर जनपद के एक मध्यवित्त किसान परिवार में। गोरखपुर विश्व विद्यालय से एम ए हिंदी । आरंभिक लेखन सर्जनात्मक कविता कहानी उपन्यास और आलोचना। में भारत की सभी भाषाओं को सीखने के क्रम में भाषाविज्ञान और इतिहास की प्रचलित मान्यताओं से अनमेल सामग्री का प्रभावशाली मात्रा में पता अपने अपने PDF/EPUB or चलने पर इसकी छानबीन के लिए स्थान नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन अंशतः प्रकाशित नाग.

4 Comments on "PDF ¾ BOOK अपने अपने राम FREE"

  • Aman Kumar

    PDF ¾ BOOK अपने अपने राम FREE अपने अपने रामअपने अपने राम राम की कथा को सर्वथा भिन्न रूप में प्रस्तुत करता उपन्यास है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका यथार्थ रूप। यह कोरा आदर्श नहीं है। इसमें राम 'राम' हीं हैं 'भगवान' नहीं। यहाँ राम की मर्य


  • Gangadhar Jat

    PDF ¾ BOOK अपने अपने राम FREE अपने अपने रामvery nice


  • Saurabh

    PDF ¾ BOOK अपने अपने राम FREE अपने अपने रामअब तक मैं यह पुस्तक दो बार पढ़ चुका हूँ। यह पुस्तक रामायण का एक कल्पित पाठांतर है। यूँ कहें कि यदि प्रभु राम और उनके परिवार के साथ बिग बॉस खेला जाये तो कुछ ऐसा ही बनेग


  • Pankaj Agrawal

    PDF ¾ BOOK अपने अपने राम FREE अपने अपने रामजाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी | यही इस महा काव्यात्मक उपन्यास का शीर्षक आभास कराता है | लेखक के राम न तो भगवान हैं और